‘मटियाबुर्ज’ में साधु, लकड़हारा और विग बनाने वाला हत्या की बात करते हैं; मंच के दूसरे हिस्से में घटना स्मृति-दृश्य में खुलती है। हर बयान के साथ देखा हुआ सच बदलता है।

ढाँचा अकीरा कुरोसावा की ‘राशोमोन’ से आया। रमेशचंद्र शाह ने बी. वी. कारंत के आग्रह पर इसे भारत भवन रंगमंडल के लिए नाट्य-रूप दिया। जयंत देशमुख ने जापानी द्वार की जगह मटियाबुर्ज रखा।

देशमुख 1982–95 में रंगमंडल के सदस्य थे और बाद में भोपाल में एकरंग बनाया। प्रस्तुति में एक ओर तीन पात्र बयान देते हैं; दूसरी ओर उसी घटना का स्मृति-दृश्य खुलता है।

भारत भवन रंगमंडल स्वयं को पेशेवर नाट्य-दल बताता है। उसका रंगमंच पुस्तकालय और संदर्भ-संग्रह नाट्य अभ्यास की अलग बुनियाद है। इसी संस्थान के लिए तैयार हुआ रूपांतरण 2026 के भारत रंग महोत्सव में एकरंग की प्रस्तुति के रूप में सूचीबद्ध था। बदलते स्थान और दृश्य-क्रम ने पुराने पाठ को नए मंच से जोड़ा।

मुख्य बातें

  • रमेशचंद्र शाह ने इसे भारत भवन रंगमंडल के लिए रूपांतरित किया।
  • देशमुख 1982–95 में रंगमंडल सदस्य रहे।
  • एकरंग की प्रस्तुति 10 फरवरी को दिल्ली में सूचीबद्ध थी।

स्रोत और संदर्भ

  1. National School of Drama — भारत रंग महोत्सव · Matiyaburj — director’s note and Ekrang profile ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. Bharat Bhavan · Rangmandal — A Professional Repertory ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।

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